रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड के बड़गांव से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां ग्रामीणों और एक निजी स्पंज कंपनी के बीच जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
मामला है BS Sponge Private Limited का। बड़गांव के ग्रामीणों ने कलेक्टर रायगढ़ को लिखित में शिकायत सौंपी है और कंपनी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का पहला आरोप है – *सरकारी राजस्व भूमि पर कब्जा।*
ग्रामीणों के मुताबिक, खसरा नंबर 145 जो कि शासकीय राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है, उस जमीन पर कंपनी ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। बिना विधिवत सीमांकन के, बिना नाप-जोख के वहां बाउंड्री वॉल का निर्माण शुरू कर दिया गया है। साथ ही बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई भी शुरू कर दी गई है, जो पर्यावरण के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
दूसरा आरोप और भी बड़ा है – *160 एकड़ जमीन की खरीद में धोखाधड़ी का।*
ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी संचालकों ने गांव के भोले-भाले ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर, पूरी जानकारी दिए बिना करीब 160 एकड़ जमीन खरीद ली है। इस जमीन पर स्पंज आयरन प्लांट लगाने की तैयारी चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन के डायवर्सन के समय भी तथ्यों को छिपाया गया और प्रशासन को गुमराह किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि ये लड़ाई आज की नहीं है। इसको लेकर वो पहले भी कई बार प्रशासन के दरवाजे खटखटा चुके हैं। 6 अक्टूबर 2025 को तहसीलदार तमनार और एसडीएम घरघोड़ा को लिखित शिकायत दी गई थी।
इसके बाद 26 नवंबर 2025 को बड़गांव में एक विशेष ग्रामसभा बुलाई गई। इस ग्रामसभा में सर्वसम्मति से एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में साफ लिखा था कि – ग्रामसभा और ग्राम पंचायत की बिना पूर्व अनुमति के कंपनी गांव में किसी भी तरह का निर्माण कार्य या प्लांट का काम शुरू नहीं करेगी। इस प्रस्ताव की कॉपी तहसीलदार से लेकर एसडीएम और कंपनी प्रबंधन तक सबको भेजी गई थी।
लेकिन आरोप है कि कंपनी ने ग्रामसभा के इस प्रस्ताव को भी कचरे में फेंक दिया। 28 नवंबर 2025 को फिर से एसडीएम घरघोड़ा को शिकायत दी गई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, और कंपनी का काम बदस्तूर जारी है।
अब ग्रामीणों ने कलेक्टर से तीन बड़ी मांगें रखी हैं।
पहली मांग – खसरा नंबर 145 का राजस्व अभिलेखों के आधार पर फिर से सीमांकन किया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
दूसरी मांग – अगर जांच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा साबित होता है, तो जमीन को तत्काल कब्जा मुक्त कराया जाए और जिम्मेदार कंपनी के अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
और तीसरी सबसे अहम मांग – ग्रामसभा के प्रस्ताव का सम्मान किया जाए और पंचायत की मंजूरी के बिना कंपनी के सारे कामों पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक किसी भी ग्रामीण के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई न की जाए।
गौर करने वाली बात ये है कि इस पूरे मामले में अभी तक कंपनी प्रबंधन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का कोई भी पक्ष सामने नहीं आया है।
अब देखना होगा कि कलेक्टर की जांच में क्या निकलता है। क्या बड़गांव के ग्रामीणों को इंसाफ मिल पाएगा या फिर 160 एकड़ जमीन पर कंपनी का प्लांट खड़ा हो जाएगा?


