हम आजादी की 79वीं वर्षगांठ अर्थात 80 नम्बर का स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे है पर विकास की बड़ी बड़ी बाते करते हमारे कर्णधारों के लिए यह मार्ग जो तारापुर से टेका होकर गोर्रा पचेड़ा अमलडीहा की ओर जाने वाले निर्माणाधीन सड़क है पिछले दो – तीन वर्षों से अपनी पूर्णता की बांट जोह रहा है ! इस रास्ते होकर न केवल ग्रामीण जन बल्कि ग्राम टेका , पचेड़ा, अमलडीहा और अन्य गांव के विद्यार्थी तारापुर विद्यालय पढ़ने के लिए आते है . स्कूली बच्चे गिरते – पड़ते अपने सायकल से बमुश्किल स्कूल पहुंचते है । बेचारे विद्यार्थी शिकायत करें तो कहाँ और किससे करें ? ग्रामीण जन तो समझ ही नहीं पा रहे कि इस सड़क के नहीं बन पाने का क्या कारण है और यह कब पूर्ण होगा ?
आजादी के अमृत महोत्सव मनाकर आगे बढ़ते , तिरंगा रैली से देशभक्ति का जज़्बा भरते , हम विकसित भारत की बड़ी बड़ी बाते करते , आखिर यह कैसी आज़ादी है ? कहाँ की आजादी ? क्या भ्रष्टाचार और मनमानी करने की आजादी ? आम आदमी को तकलीफ़ झेलने की आजादी . चंद लोगों को एशो आराम की आजादी . ., तब तो व्यर्थ है इस तरह की आजादी . . . . . !
हे कर्णधारों हे .. हे ठकेदारों . . हे उच्चाधिकारियों . . हे जिम्मेदार लोगों . . . थोड़ा बहुत जमीर जिंदा है तो शर्म करो अफसोश करो . कुछ गांव के लोगों की भावना को सुनो , कुछ विद्यार्थियों की पीड़ा को समझों . . . ! बस हम व्यथित व्यक्ति और क्या कर सकते हैं ?

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