जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को संसद मार्च के वक्त घायल हुए लोगों की जानकारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और सांसद साकेत गोखले ने आरटीआई (RTI) के जरिए मांगी थी।अस्पतालों की तरफ से आए आरटीआई के जवाब में निम्नलिखित खुलासे हुए हैं:लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC): अस्पताल ने अपने जवाब में बताया कि वहां पैलेट गन (pellet/projectile) की चोटों वाले कम से कम 9 लोग इलाज के लिए आए थे।सफदरजंग अस्पताल: अस्पताल ने अपने जवाब में पैलेट गन से घायल 1 व्यक्ति के इलाज की पुष्टि की।कुल संख्या: दोनों अस्पतालों के आंकड़ों को मिलाकर पैलेट गन से घायल होने वाले लोगों की पुष्टि की संख्या 10 है, जो शुरुआती दावों (5 लोग) से दोगुनी है। एम्स और आरएमएल (RML) अस्पताल के आंकड़े आने अभी बाकी हैं।
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल और घायलों का यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की न्यायिक समीक्षा के दायरे में है। इस मामले को लेकर कोर्ट में महत्वपूर्ण घटनाक्रम चल रहे हैं:1. सुप्रीम कोर्ट में याचिका और सुनवाईयाचिका: दो घायल प्रदर्शनकारियों और खुफिया ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक यशोवर्धन आजाद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नागरिक भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है।दिशानिर्देश तैयार करना: चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के उपयोग को लेकर व्यापक और सख्त दिशानिर्देश तैयार करेगा।2. कोर्ट द्वारा दिल्ली पुलिस से जवाब-तलबस्टैंडिंग ऑर्डर की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े अपने ‘स्टैंडिंग ऑर्डर’ (नियम/प्रोटोकॉल) को कोर्ट के रिकॉर्ड पर पेश करने का आदेश दिया है।ग्रेड प्रतिक्रिया की जांच: कोर्ट ने पुलिस से पूछा है कि यह प्रोटोकॉल सार्वजनिक क्यों नहीं है और किस परिस्थिति में व किस प्रकार की श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया (graded response) के तहत पैलेट गन चलाने की अनुमति दी जाती है।

  1. दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में कोर्ट और जनता के सामने पैलेट गन के इस्तेमाल से पूरी तरह इनकार किया था।हालांकि, संसद स्ट्रीट थाने की जनरल डायरी (DD Entry) से यह साबित हो चुका है कि रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने एंटी-रिएट गन से दो राउंड फायर किए थे।अस्पताल के रिकॉर्ड और साकेत गोखले द्वारा जारी आरटीआई (RTI) के आधिकारिक दस्तावेज अब कोर्ट के समक्ष पुलिस के पुराने दावों को गलत साबित करने और घायलों को कानूनी राहत दिलाने में मजबूत सबूत (Evidence) के तौर पर पेश किए जा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *