भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से व्यक्तिगत माफी की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जुकरबर्ग सार्वजनिक माफी नहीं मांगते हैं, तो मेटा को आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) प्रोटेक्शन वापस ले लिया जाएगा।
*मुख्य बिंदु और विवाद की वजह वीडियो हटाने का मामला*
फेसबुक ने 23 जुलाई को पोस्ट किया गया पीएम मोदी का एक वीडियो हटा दिया था, जिसमें उन्होंने पेपर लीक मामले पर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और छात्रों की चिंताओं को दूर करने की बात कही थी।

*5 घंटे तक गायब रहा कंटेंट*
*संसदीय समिति की बैठक में मेटा (Meta) के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक (लगभग 5 घंटे) प्लेटफॉर्म से गायब रहा।मेटा की सफाई: कंपनी के अधिकारियों ने इसे एक तकनीकी खराबी (Technical Glitch) बताते हुए माफी मांगी और कहा कि वीडियो को बाद में रीस्टोर (बहाल) कर दिया गया था।
*देश को अस्थिर करने का आरोप*
निशिकांत दुबे ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि मेटा इंडिया का माइंडसेट भारत को अस्थिर करने का है और भारत के प्रधानमंत्री का कंटेंट हटाना स्वीकार्य नहीं है।
*क्या है ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा?*
आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से छूट मिलती है। यदि यह सुरक्षा हटती है, तो प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाली किसी भी गैर-कानूनी सामग्री के लिए सीधे मेटा को जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा और उस पर कानूनी मुकदमे चलाए जा सकेंगे।
*विपक्ष का रुख*
बैठक के दौरान विपक्षी सांसदों ने इस पर असहमति जताई। कांग्रेस सांसद शफी परम्बिल सहित अन्य विपक्ष के नेताओं का कहना था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कंटेंट मॉडरेशन फैसलों पर राजनीतिक प्रभाव नहीं होना चाहिए और असहमति या आलोचना को देश विरोधी कंटेंट नहीं माना जा सकता।


