*CM साय के काफिले पर करोड़ों खर्च सरकार बोली हमारे पास रिकॉर्ड नहीं= प्रिंकल दास*
*RTI में मांगी गई जानकारी पर गोलमोल जवाब, रिकॉर्ड “नहीं होने” का दावा बेहद संदिग्ध*
रायगढ़/
आरटीआई कार्यकर्ता एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के जिला उपाध्यक्ष प्रिंकल दास द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के उपयोग हेतु/काफिले में पिछले वर्षों में खरीदे गए सरकारी वाहनों की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। इस संबंध में छत्तीसगढ़ स्टेट गैराज द्वारा दिए गए जवाब ने सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
RTI आवेदन में मुख्यमंत्री काफिले हेतु खरीदे गए वाहनों का:
वाहन मॉडल,
खरीद तिथि,
प्रति वाहन लागत,
कुल व्यय,
टेंडर प्रक्रिया,
भुगतान विवरण,
वर्तमान उपयोग,
संबंधित फाइल नोटिंग एवं स्वीकृति आदेश
जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई थीं।
लेकिन जन सूचना अधिकारी ने जवाब में केवल यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि संबंधित अभिलेख उनके कार्यालय में “संधारित नहीं” हैं। इस संबंध में आर टी आई कार्यकर्ता श्री
प्रिंकल दास ने कहा कि यह जवाब न केवल तथ्यहीन है बल्कि RTI कानून की भावना के खिलाफ भी है। मुख्यमंत्री काफिले की गाड़ियों का संचालन एवं रखरखाव करने वाली एजेंसी यदि रिकॉर्ड होने से ही इनकार करे, तो यह बेहद गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि:
“सरकार यह स्पष्ट करे कि जनता के करोड़ों रुपये से खरीदी गई गाड़ियों का रिकॉर्ड आखिर किस विभाग में है? यदि स्टेट गैराज के पास जानकारी नहीं है, तो क्या राज्य सरकार बिना रिकॉर्ड के वाहन खरीद रही है? या फिर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है?”
प्रिंकल दास ने आरोप लगाया कि सरकार जनता से तथ्य छिपाने का प्रयास कर रही है। RTI Act की धारा 6(3) के तहत यदि जानकारी किसी अन्य विभाग में उपलब्ध थी, तो आवेदन को संबंधित विभाग को हस्तांतरित किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा करने के बजाय जवाबदेही से बचने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल सूचना छिपाने का नहीं बल्कि सरकारी खर्चों में पारदर्शिता खत्म होने का संकेत है। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि मुख्यमंत्री काफिले पर कितना खर्च किया गया और किन प्रक्रियाओं के तहत वाहन खरीदे गए।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने मांग की है कि:
मुख्यमंत्री काफिले हेतु खरीदे गए सभी वाहनों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
वाहन खरीदी से संबंधित टेंडर, भुगतान और स्वीकृति आदेश सार्वजनिक किए जाएं।
रिकॉर्ड “उपलब्ध नहीं” होने के दावे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
RTI आवेदनकर्ता को पूर्ण एवं तथ्यात्मक जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
सूचना छिपाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
प्रिंकल दास ने चेतावनी दी कि यदि सरकार पारदर्शिता नहीं दिखाती, तो इस मामले को प्रथम अपील, राज्य सूचना आयोग और जनआंदोलन के माध्यम से प्रदेशभर में उठाया जाएगा।


