बंटवारा लंबित, फिर भी रातों-रात हो गया नामांतरण – पीड़ितों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी घरघोड़ा को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम चारमार के खसरा नंबर 5/5, 5/6, 12/2 सहित कुल 19 खसरों की लगभग 71.767 हेक्टेयर भूमि पैतृक है। इस जमीन के 1/2 हिस्से पर प्रार्थियों (चिंतामणि और सरधाकर) का कानूनी स्वत्व है। इस जमीन के बंटवारे का मामला वर्तमान में नायब तहसीलदार घरघोड़ा के न्यायालय में लंबित है। आरोप है कि इसी लंबित अवधि का फायदा उठाते हुए, पटवारी हल्का नंबर 18 और उच्चाधिकारियों ने बालेश्वर, बंशीधर और गजाधर के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचा और रातों-रात जमीन का फर्जी नामांतरण उनके और उनके परिजनों के नाम कर दिया।


अधिकारियों की लीपापोती ने खोली पोल – फर्जीवाड़े की हद तो तब हो गई जब पीड़ितों को इस बात की भनक लगी। शिकायत में स्पष्ट उल्लेख है कि जैसे ही प्रार्थियों ने नायब तहसीलदार घरघोड़ा को इस कूट रचित नामांतरण की जानकारी दी, तो अपनी और अपने कर्मचारियों की गर्दन फंसती देख उन्होंने आनन-फानन में पटवारी और लोक सेवा केंद्र को आदेश देकर रिकॉर्ड में संशोधन करा दिया, ताकि खुद का बचाव किया जा सके। राजस्व अधिकारियों का यह कृत्य उनकी संदिग्ध भूमिका और भ्रष्ट आचरण की ओर सीधा इशारा करता है।
आपराधिक तत्वों की मदद से ‘बी. एस. स्पंज प्रा. लि. को बेची जमीन – भू-माफियाओं का यह खेल सिर्फ नामांतरण तक नहीं रुका। खसरा नंबर 86/29 और 86/30 की बेशकीमती जमीन को 5 मई 2026 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक रसूखदार कंपनी ‘बी. एस. स्पंज प्रा. लि.’ के पक्ष में बेच दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस सौदे में पूर्व से आपराधिक मामलों में लिप्त रहे सच्चिदानंद पटनायक का इस्तेमाल किया गया, जिसने कंपनी के डायरेक्टर और अधिकृत व्यक्तियों के साथ साठगांठ कर इस अवैध बिक्री को अंजाम दिया। बिना सहखातेदारों की सहमति के यह विक्रय पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
क्या प्रशासन करेगा ‘सफेदपोशों पर कार्रवाई? – चिंतामणि गुप्ता और सरधाकर गुप्ता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी रिश्तेदारों, लिप्त राजस्व अधिकारियों (पटवारी व नायब तहसीलदार) और कंपनी से जुड़े दलालों के खिलाफ धोखाधड़ी की सख्त कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह उठता है कि क्या रायगढ़ जिला प्रशासन इस महाघोटाले की निष्पक्ष जांच कर अपने ही विभाग के अधिकारियों और रसूखदार भू-माफियाओं पर नकेल कसेगा? या फिर फाइलों में यह शिकायत भी लाल फीताशाही की भेंट चढ़ जाएगी? घरघोड़ा तहसील में पनप रहा यह जमीन घोटाला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

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