कहानी शुरू होती है रायगढ़ के छोटे से गाँव बायांग से।
जहाँ सपनों से ज्यादा धूल थी… और अवसरों से ज्यादा चुनौतियाँ।
यहीं पैदा हुआ एक बच्चा, ओ.पी. चौधरी।

8 साल की उम्र में पिता का निधन।
माँ चौथी पास।
घर चलाने के लिए संघर्ष।
ये वो उम्र थी जहाँ बच्चे रोते हैं…
पर इस बच्चे ने रोकर नहीं, चुपचाप भीतर आग जलाकर रास्ता चुना।

सरकारी स्कूल, टूटी बेंच, एक ब्लैकबोर्ड।
लेकिन एक चीज़ अलग थी,
सोच।
जहाँ दूसरे बच्चे परिस्थितियाँ देखते थे,
वो बच्चा संभावनाएँ देखता था।

बी.एससी पूरी की।
फिर UPSC की राह पकड़ी।
लोगों ने कहा
“गाँव से IAS? मुश्किल है।”
उसने कहा
“मुश्किल वहाँ है जहाँ हिम्मत कम है।”

2005 में IAS बने।
गाँव का लड़का अब उन कुर्सियों पर था,
जहाँ फैसले लिए जाते हैं,
जहाँ सिस्टम बदलता है।

दंतेवाड़ा जैसे खतरनाक जिले में कलेक्टर बनकर पहुँचे।
नक्सलवाद, डर, धमकियाँ…
लेकिन उन्होंने कहा
“अगर कोई आगे नहीं आता, तो बदलाव पीछे ही रह जाता है।”

उन्होंने स्कूल बदले, बच्चों की शिक्षा बदली,
भारी बस्ते कम किए, मॉडल स्कूल बनाए।
लोगों ने पहली बार उम्मीद देखी।

प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए नामांकन मिला।
लेकिन इससे बड़ा इनाम था,
लोगों का भरोसा।

फिर एक दिन…
उन्होंने IAS की नौकरी छोड़ दी।
सब हैरान।
सबने कहा
“ये गलती है।”
लेकिन उन्होंने कहा
“मेरी मंज़िल कागज़ पर फाइलें नहीं, लोगों के बीच बदलाव है।”

2018 में राजनीति में आए।
चुनाव लड़े, हारे…
लेकिन रुके नहीं।
क्योंकि
जो गाँव से निकलकर IAS बन सकता है,
वो एक हार से नहीं टूट सकता |

2023 में रायगढ़ से चुनाव जीता।
फिर छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त मंत्री बने।
अब वही लड़का राज्य की आर्थिक रणनीति लिख रहा है,
जो कभी टूटी बेंच पर बैठकर पढ़ता था।

ये कहानी क्यों खास है?
क्योंकि यह आपको बताती है,
शुरुआत छोटी हो तो क्या?
इरादा बड़ा होना चाहिए।

पिता का साया ना हो तो क्या?
आत्मविश्वास का आसमान होना चाहिए।

संसाधन कम हो तो क्या?
मेहनत ज्यादा होनी चाहिए।

“आपका जन्म स्थान आपकी दिशा तय नहीं करता,
आपका संघर्ष तय करता है |

OP Choudhary 🙏🙇‍♂️

#opchoudhary #biography #chhattisgarh #bjpfordevelopment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *